आना,चाहिये

हर हसरतें हुई पूरी अब तो हसना आना चाहिये
जिंदगी तेरा शुक्रिया कह कर गुनगुनाना चाहिये।।

सब तो मिल गया फिर भी तुम आंसू बहाते हो
छोड़ सबको बढ़े थे आगे,अब क्यों जमाना चाहिये।।

पैसा,शौहरत,इज्जत तुम्हें तो बस पाना था
मिला सब कुछ तो, अब क्यों वही जमाना चाहिये।।

अब क्यों इस भीड़ मे कोई अपना चाहते हो
देखो इस भीड़ से भी नाता तुम्हें निभाना चाहिये।।

सोचा ना पहले तुमनें अपने अपनों के बारे मे
अब क्यों सोचे तुम साथ अपनों का ही पाना चाहिये।।

वीना आडवानी
नागपुर, महाराष्ट्र