वो वृक्ष है

वो वृक्ष है शांत है
वो वृक्ष है ख़ुश है              
वह चल नहीं सकता
जमीन मे जाता है
गगन तक जा सकता है
वह कुछ कह नहीं सकता
वह सिर्फ सुन सकता है
जड़ों को फैला सकता है
वह हँस नहीं सकता
वह रो सकता   है
मानव का हित करता है
कष्टों को वह सहता है  
वह गर्दन कटवा लेता है
शाप नहीं देना चाहता है
जनसंख्या बढ़ती जाती
वृक्ष संख्या घटती जाती
केवल यही सोचकर
खुद को कोस रहा है
कैसे वह देगा जन को
जो वह देना चाहता खुद को
वो वृक्ष है शांत है
वो वृक्ष है ख़ुश है l

पूनम पाठक