होलिका दहन के लिये सज गयी ऐशबाग की लकड़ी मंडी

सूखे के साथ हरे पेडों की लकड़ी भी बिक रही है मण्डी में आम, पकरी तथा गूलर की लकड़ी से जलायी जाती है होलिका

लखनऊ। होलिका दहन के लिये लकड़ी के लिये ऐशबाग की लकड़ी मण्डी पूरी तरह से सज गयी है और लोग एकत्र चन्दे के हिसाब से लकड़ी की खरीदारी कर रहे है। लकड़ी व्यापारी राम सिंह के अनुसार वह पिछले पन्द्रह साल से केवल होलिका दहन के लिये ही लकड़ी जिसे आम भाषा में मुजंर कहा जाता है को बेचने यहाॅ आते है। पिछले वर्ष आम के मुजंर का दाम पाॅच सौ रूपये प्रति कुन्तल था जो इस बार तीन सौ से साढ़े तीन सौ रूपये कुन्तल है जबकि पकरी और गूलर की लकड़ी भी इस बार महंगाई की वजह से ढाई सौ रूपये से तीन सौ रूपये कुन्तल के हिसाब से बिक रही है। वही व्यापारी राजेश ने बताया कि वैसे तो आम की ही लकड़ी से होलिका को जलाना चाहिये क्योकि यह पर्यावरण के लिये सही होती है परन्तु सस्ते के चक्कर में लोग पकरी व गूलर के साथ अन्य लकड़ियों से होलिका को जला देते है। वैसे देखा जाय तो जिसे मुजंर कहते है वह पेड़ के नीचे जड़ का ठॅूठ होता है जो कई दिनों तक जलता रहता है। हरे पेड़ो की अवैध कटान के बाद यही ठूॅठ होली में जलाने के लिये बेच दिया जाता है। वैसे भी होली के मौके पर काफी तादाद में हरे पेड़ यहाॅ बिक जाते है क्योंकि हरे पेड़ो का रेट काफी कम होता है और ये कई दिनों तक जलते भी रहते है। करीब एक दर्जन के आस-पास व्यापारी यहाॅ केवल होली की लकड़ी बेचने के लिये आते है। दबी जुबान में व्यापारियों ने बताया कि स्थानीय पुलिस को भी हिस्सा देना पड़ता है बिना उसके यहाॅ अपना माल उतार ही नहीं सकते है।