सज गए पिचकारियों के बाजार, ग्राहकों का इंतजार

उरई/जालौन। कोरोना के फिर से सिर उठाने की वजह से बाजारों में ज्यादा रौनक नहीं है लेकिन होली के लिए पिचकारी, रंग, मास्क, व बनावटी बालों की दुकानें सज गई हैं। प्रमुख बाजार में इस साल कुछ नई पिचकारियां भी बच्चों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इनमें मिसाइल, म्यूजिक पेप, गनपेट आदि नामों की पिचकारियां पसंद बनी हैं। इनकी कीमत 200 से लेकर 450 रुपये तक है। इसी तरह छोटे बच्चों के लिए वाटर टैैंक, जो कई कार्टून पात्रों पर आधारित हैं, उनकी भी पिचकारियां बाजार में दिखाई दे रही हैं। कीमत 250 से 800 रुपये तक है। इसी तरह हर्बल कलर के पैकेट 40 रुपये, हर्बल गुलाल के पैकेट 20 से 70 रुपये, दस किलों के गुलाल की बोरी की कीमत 130 रुपये है। ठीक इसी तरह से अलग-अलग आकृति वाले मास्कों की कीमत 10 से 300 रुपये तक है। कई तरह के हर्बल स्प्रे की कीमत 40 से 90 रुपये है। बाजार में कलर फुल मैजिक बलून के पैकेट की कीमत लगभग 150 रुपये में उपलब्ध है। नए-नए तरह के बनावटी बाल भी लोगों को लुभा रहे हैं। कीमत 40 से लेकर 120 रुपये तक है। सबसे मंहगी टैंक वाली पिचकारी 1100 रुपये की है। दुकानदार राशिद का कहना है कि बाजार की हालात को देखते हुए इस बार माल में लगी हुई लागत का निकलना ही मुश्किल लग रहा है। वहीं बाजार में पिचकारियां देख रहे गोपालगंज निवासी आशुतोष ने बताया कि पहले से ही आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। फिर महीने का आखिरी होने से भी मंहगी खरीदारी की हिम्मत नहीं हो रही है। रंग और पिचकारी के बाद होली में सबसे अधिक महत्व गुझियों का है। इसके लिए खोया बाजार की दुकानों पर चहल पहल नजर आने लगी है। इस बार खोया के रेट करीब 300 रुपये प्रति किलो हैं, जो कि पिछली बार की तुलना में 20 रुपये अधिक हैं। दुकानदारों का कहना है कि रविवार से बिक्री बढ़ने की संभावना है।