व्यंग्य

कुछ लौटकर मयखाने से,

लुढ़के हुए हैं लोग।

कुछ  मौके की तलाश में,

दुबके हुए हैं लोग।

अब तो सिजदा कबूल करने में,

 लगने लगा है डर,

 अंजाम की दहलीज पर,

उलझे हुए हैं लोग। 

गिरगिटी रंग ब्रांड सरस,

समय की डिमांड है।

सुन्दर काण्ड के साथ,

जुड़ा लंका का काण्ड है।।

साधना और भक्ति के,

धूल भरी आंधी में,

हर कोई शिक्षित,

विद्वान और प्रकांड है।।

-गौरीशंकर पांडेय 'सरस,