( निशाना )

फूले नहीं समा रहे,

 गंजे और निठल्ले।

किस्मत को दे रहे दाद,

हो गई बल्ले -बल्ले।

जो सदा कन्नी काटते थे,

अब छूने को पैर,पूछने को खैर तैयार हो गए।

चुनावी अखाड़ा मे,

 कूदने को तैयार हो गए।।

होशियारी  को पलीता ,

लगेगा  सरस ,

 अब बेवकूफ भी

 होशियार हो गए।।

सामने चुनाव और होली का बहाना है।

कहीं पर तीर और, 

कहीं पर निशाना  है।।

-गौरीशंकर पाण्डेय सरस ।