जीत लो

ये गगन ये धरा,

ये मौसम हसीं।
चलो तुम सदा ,
रुको ना कभी।

सागर की लहरें,
नदिया की धारा।
कुछ बताएं हमें,
समझो इशारा।

ना रुकना कभी ,
चलते रहना सभी।
मिले उर्वर धरा,
या बंजर जमीं।

मिले पुष्प ,कंटक,
या पतझड़ कभी।
मिले रोशन जहां,
या अँधेरी गली।

चूम लो तुम गगन,
तुम जमीं नाप लो।
ना डिगे मन कभी,
धैर्य धरा सा धरो।

शीश झुके ना कभी,
ऐसा भूधर बनो,
छत्रछाया मिले ,
ऐसा अम्बर बनो।

मुश्किलों पर करो,
तुम सदा ही फतह।
बनाओ दिलों में,
सदा तुम जगह ।

बन सितारा चमको,
गगन में सदा।
जीत लो ये जहाँ,
यही है कामना ।

स्वरचित
सपना (स. अ.)
प्रा.वि.-उजीतीपुर
वि.ख.-भाग्यनगर
जनपद-औरैया