प्रेम में...

प्रेम में...

हुई खुशनुमा सी फिज़ा

पल भर में हो जाती है बोझ,

जब तुम रूठ जाते हो।


प्रेम में.. 

आई उदारता की भावना

पल भर में हो जाती है ईर्ष्या,

जब किसी और से बतियाते हो।


प्रेम में...

मिला मन को सुकून

पल भर में बदल जाता है डर में,

जब तुम जुदा हो जाते हो।


जितेन्द्र " कबीर "

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