तुम्हारा अप्रतिम सौन्दर्य


तुम्हारा अप्रतिम सौन्दर्य

मेरे प्रेम के दावानल को

शीत  तरंग में

परिवर्तित कर देता है ,

तुम्हारी शबनमी आँखों

से निकला नूर

मेरे अंतर्मन को

ज्योतिर्मय कर देता है,

तुम्हारे होठों की लालिमा

से टपकता अनुराग

मेरे अन्दर गाहे/बगाहे

दस्तक देने वाले क्रोध के लिए

प्रशीतक बन जाता है,

तुम्हारी सुरीली आवाज

का जादू

मुझे सम्मोहित

कर देता है ,

तुम्हारा भावुकता /

अति संवेदनशीलता

और संवेदिता/मेरे

तनावग्रस्त मन को

अजीब सा सुकून देती है ,

और/तुम्हारा कभी कभी

शिकायती अंदाज में मुझे

"निष्ठुर" कहना/मेरे कवि मन को

बहुत प्यारा लगता है

और/तुम मुझे एक

"रोमांटिक कविता" नजर

आती हो.


राजेश कुमार सिन्हा

मुम्बई