खत जला देना

दिए थे प्यार से मैंने जो वो अब खत जला देना
मुकम्मल इश्क का वादा बस थोड़ा जता देना
बुझा देना मुहब्बत के चरागों को मगर सुन लो
मेरी तस्वीर को भी अब खताओं की सजा देना।
जुदा हुई हैं राहें जब फिर किस बात का गम है
जब कोई पूछे मेरे बारे में तो पागल बता देना।
चले थे साथ हम दोनों मुहब्बत के सफर पर तो
मसलकर निशानी को मुझे दिल से भुला देना
कभी तकदीर जब तुमको मुझसे मिलाए तब
निगाहें फेर लेना तुम बस थोड़ा मुस्कुरा देना।
किताबों में रखे गुलाबों की महक खत्म हो गई
सूखा प्यार है मेरा ये अब किताबों से हटा देना।
जब नहीं फिकर उसको तो जलता है क्यों रवि
मुहब्बत की अपनी इक अलग दुनिया बसा देना

रवि श्रीवास्तव
रायबरेली, उत्तर प्रदेश