मेरी गाड़ी सर-सर चलती

मेरी गाड़ी सर-सर चलती,
इसमें पहिए चार हैं।
हट जा भाई दूर तू हट जा,
इसमें क्या रफ्तार है।

हेड लाइट दो लगी हैं इसमें,
लगे हैं पीछे डीपर जी।
सीटें इसकी गद्दीदार हैं,
तुम भी आओ बैठो जी।
सतरंगी रंगों से सजी है,
इसमें मौज-बहार है।
मेरी गाड़ी...........।।

हार्न बजे हैं पम-पम, पों-पों,
चलती है रिमोट से।
इसे दिया था दादा जी ने,
जन्म दिवस पर गिफ्ट में।
बड़ी सलोनी गाड़ी मेरी,
छोटा सा आकार है।
मेरी गाड़ी...........।।

कलकत्ता, दिल्ली जाएगी,
और जाएगी अमृतसर।
देखेंगे हम दूर देश को,
सुंदर होगा ये सफर।
देश के घर के लोग मिलेंगे,
हमको हर्ष अपार है।
मेरी गाड़ी........।।
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• अरविंद कुमार सिंह
शिक्षक, प्राo विo धवकलगंज
बड़ागाँव, वाराणसी