देखा नहीं मैंने

बहस से देखा नहीं मैंने
किसी विवाद को कभी सुलझते हुए,
बहुत बार देखे हैं लेकिन
रिश्तों के धागे उलझते हुए।

तर्क से देखा नहीं मैंने
किसी को अंतर्मन से झुकते हुए,
बहुत बार देखा है लेकिन
स्नेह से मन में घर करते हुए।

गुस्से से देखा नहीं मैंने
किसी समस्या का हल निकलते हुए,
बहुत बार देखा है लेकिन
बनी बनाई बात भी बिगड़ते हुए।

शोक से देखा नहीं मैंने
किसी बिगड़े काम को बनते हुए,
बहुत बार देखा है लेकिन
संघर्ष से सफलता हासिल करते हुए।

रौब से देखा नहीं मैंने
किसी को दिलों पर हुकूमत करते हुए,
बहुत बार देखा है लेकिन
लोगों को किनारा हमसे करते हुए।

जितेन्द्र 'कबीर'
संपर्क सूत्र - 7018558314