चौरी चौरा

चौरी चौरा शताब्दी वर्ष,
स्वर्ण अक्षरों में अंकित है,
घटना चौरी   चौरा   की।
चिंगारी जो बन गई ज्वाला,
भारत   के   संग्राम   की।
गरम लहू ने थाने जाकर,
दुश्मन को आग लगाई थी।
जन जन की सोई हिम्मत ,
बरसाकर आग जगाई थी।
राख का ढेर बना के छोड़ा,
भारत   के   मतवालों ने ।
एक एक के अंतर्मन में,
पले ज़हर के   दानों ने।
गांधी ने आंदोलन छोड़ा,
व्यक्त किया भारी दुख था।
जनता की आंखो में आंसू,
भरा हुआ खुशी का था।
कब तक उसको घर में रखते,
जो हमको ही लूट रहा।
बनकर के आस्तीन सांप जो,
विष अपनों को बांट रहा।
बदली दिशा हवा ने अपनी,
जोश भरा भीतों में भी।
आज के दिन ने आजादी में,
छाप   लगाई   अपनी भी।
आज हुए सौ वर्ष है पूरे,
महका देश का उपवन है।
ऐसी विषम घटनाओं से,
पावन हिन्द का आंगन है।

सीमा मिश्रा,शिक्षिका व कवयित्री
स्वतंत्र लेखिका व स्तंभकार उ. प्रा.वि.
काजीखेड़ा खजुहा, फतेहपुर,उत्तर प्रदेश