॥ हौसला ॥

अपनी हौसले को इतनी हवा दो कि
गुब्बारे की तरह उड़ आकाश छू सके
अपनी होसले को इतनी ताकत दो कि
सफलता की नई अर्स को पहुँच सके
अपनी हौसले को इतनी अहमियत दो कि
जग को नई रोशनी दे सके
अपनी हौसले को इतनी मजबुती दो कि
विश्वास की एक नई इबादत वो लिख सके
अपनी हौसले को इतनी जान दो कि.
पत्थर के सर पे फसल उगाने की कला ईजाद कर सके
अपनी हौसले को इतनी रफ्तार दो कि
चाँद सितारों से भी आगे जा सके
अपनी हौसले को इतनी ललकार दो कि
शेर को भी जंग ए मैदान में पछाड़ सके
अपनी हौसले को इतनी धार दो कि
दुसरे की पतंग को काट जमीं पर गिरा सके
अपनी हौसले को वो अल्फाज दो कि
कुर्तक करने वाले की बोलती बंदकर सके
अपनी हौसले को इतनी छूट दो कि
दौड़ में विपक्षी को मात दिखा सके
अपनी हौसले को वो पहचान दो कि
अपनी वो अलग पहचान बना सके
अपनी हौसले को एक नई साज दो कि
सरगम की नई एक राग जग को सुना सके
अपनी हौसले को एक अच्छी संस्कार दो कि
अपनी फण इस जग को दिखा सके।

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार 9546115088