कर्मचारी समाज के लिए ठेंगा दिखाने वाला बजट : इं. हरिकिशोर तिवारी


लखनऊ। जिस कर्मचारी समाज ने कोरोना जैसे आपातकाल में सरकार के कंधे से कन्धा मिलाकर काम किया हो। जो सरकार के निर्णय पर अमल के लिए और विकास कार्यो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हो उसके समाज के लिए बजट में ठेंगा दिखाया गया है। न तो बजट में सीज किए गए भत्तो की चर्चा की गई न ही केसलैस इलाज पर न ही पुरानी पेंशन व्यवस्था का कोई प्राविधान किया गया। यह बजट पूरी तरह से कारपोरेट घरानों के मार्ग दर्शन में बना कर्मचारी विरोधी और निराशाजनक बजट है। उक्त विचार राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी ने बजट पर प्रतिक्रिया के रूप में व्यक्त किए। हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि इनकम टैक्स में कोई राहत न मिलने से भारी निराशा है। बजट में सार्वजानिक क्षेत्र के सम्पूर्ण निजीकरण की घोषणा इस बाॅत का संकेत है कि यह बजट पूरी तरह निजीकरण और कारपोरेट घरानों का बजट है। महंगाई भत्ते के फ्रीज का दंश झेल रहे कर्मचारियों को इनकम टैक्स में कोई राहत न देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक है।उनका कहना है कि सरकार से उम्मीद थी कि सीनियर सिटीजन के लिए हेल्थ स्कीम आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बजट से सीनियर सिटीजन निराश हैं। चाहे वे पेंशनर हैं या नॉन पेंशनर। इसके आगे श्री तिवारी ने कहा कि बजट इस बाॅत का संकेत है कि सरकार सरकारी संस्थानों के निजीकरण के क्षेत्र पर अन्दरूनी तौर पर बहुत तेज प्रयास कर रही है।