कुत्ता दुकान

हमारे पड़ोसी कृपानिधान
बड़े ही कर्मयोगी
नौकरी से अवकाश प्राप्त करते ही
करने लगे अजीब हरकत
लोग कहते,
हो गए मानसिक रोगी.
आशा नहीं थी, ऐसे होगें,
अलग करेंगे
कुछ अजीब तरह का बिजनेस,
व्यापार चुनेंगे
पूर्ण विश्वास है चयन सुनकर
आप भी नाक धुनेंगे.
उन्होंने खोला है कुत्ता चराने की दुकान,
बड़े लोगों के बीच उठते-बैठते हैं
हो गई है अच्छी जान पहचान,
उपर से मां लक्ष्मी भी मेहरबान!

अपने जीवन को बहुत बढ़िया
सलीके से निर्विध्न घसीट रहे हैं
हल्दी लगे न फिटकरी
जमकर पैसा पीट रहे हैं
आजू-बाजू रहने के कारण
एक दिन मिलते सुझाव दिया--
" यार नायर
तुम भी तो होने वाले हो रिटायर
क्या करोगे उसके बाद
किस क्षेत्र को करोगे आबाद?"

सारी बाते सुनकर
मैंने जबाब दिया जल भुनकर--
"मेरा बिजनेस भी
आपके बिजनेस से मेल खाता है
कुछ समझ नहीं आता है.
सोच रहा खोलूं--कुत्ता दुकान
अभी तक लोग है इससे अंजान.
क्योंकि गाय हमारी माता है
इससे पुराना नाता है
गऊ उत्थान हेतु डालूं दुकान
इससे नहीं बनेगी पहचान
नहीं मिलेगा समाज से प्यार
लोग इतना तो जरूर कहेगें
कमबख्त है पूरा का पूरा गंवार."

आज के संदर्भ में,'कुत्ता-दुकान'
वी.आई.पी.ओं. में अपनी पहचान
कम पूंजी में अच्छा मुनाफा!
दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी,इजाफा!!

उन्होंने पूछा - कैसे?
मैंने कहा ऐसे--
" देख रहे हैं न अपने पड़ोस का
गगनचुंबी माल (MALL)
रखा गया कपड़ा पहनाकर
आदमकद डाल (DOLL)
इसी तरह का कुछ और है ऐसा
जो जनता को उल्लू बनाकर
खींच रहे हैं पैसा
अभी बात है कल की
बड़े दुकान वाले
अक्सर छोटी दुकानों से
सब्जियां खरीदकर
उसे अच्छी तरह धो-पोछकर
जगह देते,व्यवस्थित,मुकम्मल
देखने में लगे बिल्कुल अव्वल!

मैं भी सोच रहा हूं
गली-मुहल्ले के आवारा कुत्तों को
पकड़कर लाऊंगा
शैम्पू,साबुन से नहला-धुलाकर
धो-पोछकर
प्रेम-पूर्वक मुर्ग मुसल्लम
खिलाऊंगा
धीरे-धीरे,रहते सब सीख जाएंगे
इनमें भी वी.आई.पी.कुत्तों वाला
गुण आ जाएगा
तो इन कमबख़्तों को उल्लू बनाएंगे."

इतना सुनकर कृपानिधान
मुझको हाथ से रोककर
गदगद हो दिया बयान--"
यार नायर
बिजनेस के मामले में आगे निकलते जाओगे करते हुए फायर
तेरी सोच को देता दाद
तेरी जिदंगी रहेगी
पूरी-की-पूरी आबाद
हां,इस कुत्तों का रेट रखना हाई
तभी होगी जबर्दस्त कमाई
यदि रखा कम रेट,
घट जाएगा तेरा और तेरे
दुकान का वेट!

मैं अपने नौकरी के
प्रारंभिक दौर में जा रहा हूं
अपने डिफेंस एकाऊंट डिपार्टमेंट में आए होनहार लड़का
ज्योतिष नरेंद्र नाम के लड़के का
किस्सा सुना रहा हूं
मुफ्त में दे रहा था ज्योतिषिय सलाह
कर रहा था अपने विद्या के साथ गुनाह
उसने रखा था मामूली रेट
मैंने कहा यार हो जाओगे मटियामेट
रेट का ग्राफ कर ऊंचा
पहले तो वह सकुचा
मेरी बात माना,किया वैसा
जहां पहुंचाना था वहां पहुंचा.
आज बैठ गया उसका
अच्छा तालमेल
बन गया खेल.
जिदंगी का रंग बदला कुछ ऐसा
ठाठ हो गई उसकी
राजा महाराजाओं के जैसा."

मैं तुमको इसलिए कह रहा हूं
पड़ोसी होने के नाते
लंबे समय तक मुझको झेले
अब मत झेलो
मेरा फार्मूला अपनाओ
लाखों में खेलो.
कुत्ता घुमाने-फिराने,चराने
का कार्य करूंगा ठप्प
तुम्हारे दुकान में बैठकर हाकेंगे
डींग,मारेंगे गप्प
तू अपने असिस्टेंट में
मुझको रख लेना
मजदूरी जो देना हो दे देना
मैंने कहा-"ये क्या कह रहे हो गुरू
तुम्हीं तो मेरी दुनिया जहान हो
मेरे दृष्टि में अव्वल हो,महान हो
निष्पक्ष हो तरफदार.
सुनकर बाते गुम हो गई सिट्टि-पिट्टि !
मुनाफा में फिफ्टी-फिफ्टी!
होंगे बराबर के हकदार!!
...........................................
राजेंद्र कुमार सिंह
rajendrakumarsingh4@gmail.com
Watsap--9175631386