"बजट से किसको क्या मिला"

हर साल बजट की घोषणा के पहले कई अटकलें लगाई जाती है, और सालों से देखा जा रहा है वित्तमंत्री की ओर से बजट की घोषणा होते ही टीवी पर महानुभावों और अर्थशास्त्र के दिग्गज तर्क-वितर्क के ज़रिए मूल्यांकन करते बजट का विश्लेषण करते है, जिसको सुनकर आम इंसान से लेकर गृहिणी तक के मुँह से कभी संतुष्टि की ड़कार नहीं निकलती। कोई न कोई नुक्श निकालते वित्तमंत्री के सर पर हर कोई हथोड़ा ठोक देता है। देश की इतनी बड़ी आबादी को एक साथ खुश करना मुमकिन नहीं हम भी जानते है। वैसे देखा जाए तो बेलेंस बजट है। इस बजट से टैक्स देने वाले खुश होंगे और ख़ैराती नाखुश।
सुना है बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द Bougette से हुई ऐसा माना जाता है जिसका अर्थ है चमड़े के थैले। 1733 में बजट शब्द का प्रयोग इंग्लैंड में जादू के पिटारे के अर्थ में किया गया। वाकई जादू के पिटारे जैसा ही होता है ना, हमारी सोच और अपेक्षा से बाहर ही प्रस्तुत होता है। इस बार का बजट भी शायद सबके हलक के नीचे उतरने वाला नहीं
देखा जाए तो ये बजट आम आदमी का है ही नहीं। आम आदमी को राहत मिले, ऐसी तो कोई घोषणा ही नहीं हुई। उल्टा तमाम चीजों पर कस्टम ड्यूटी और सरचार्ज लगने की वजह से मोबाइल समेत बहुत सारी चीजें महंगी भी हो रही हैं। आम आदमी के लिए ये बजट निराशाजनक रहेगा।
कोरोना और लाॅक डाउन से टूट चूके आम आदमी को आयकर में छूट देने की जरूरत थी। पांच से 10 लाख रुपये के लिए स्लैब को 20 फीसदी से घटाकर के 10 फीसदी करने की मांग की गई थी, लेकिन इसमें कुछ भी नहीं मिला।
आज कोरोना के चलते देश की आर्थिक स्थिति डांवाडोल है, उस पर कई लोगों की नौकरी चली गई। देश की आधी आबादी मध्यमवर्गीय है, बजट जैसा भी हो घर की जरूरतों का जुगाड़ ही जहाँ मुश्किल हो वहाँ बजट देखने का किसे होश है।
निर्मला सीतारमन से उम्मीद थी कि वह महिलाओं के लिए जरूर कुछ ना कुछ खास करेंगी। लेकिन बजट भाषण सुनकर यूं लगा मानो महिलाओं पर भी इस बजट में कुछ खास नहीं है।
वैसे भी महिलाओं का बजट हर कुछ दिनों बाद बढ़ती महंगाई हिलाकर ही रख देती है, तो महिलाओं को जितना है, जो है उसी में चलाने की आदत होती ही है।
इस साल के बजट में करदाताओं को कोई राहत नहीं मिली, मगर सरकार ने 75 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को रियायत दी है। सरकार ने ऐलान किया कि अब 75 साल से अधिक उम्र के लोगों को इनकम टैक्स से मुक्ति दिलाई जाएगी जो सराहनीय है। वैसे ये छूट सिर्फ़ पेंशन पर दी जा रही है अगर ओर किसी तरह की आय है तो उस पर टैक्स देना होगा। हालांकि, सरकार ने इस बार टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया। इसके अलावा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने के लिए सरकार के 27.1 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज घोषणा से संरचनात्मक सुधारों को बढ़ावा मिला है। सीतारमण ने आम बजट में 64,180 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ आत्मनिर्भर स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा। जो की बहुत ही सराहनीय है।
कुछ ऐसा है 2021 का बजट
रेल बजट पर 1.1 लाख करोड़ खर्च होगा। जबकि, 2030 को ध्यान में रखकर रेवले के लिए एक प्लान तैयार हो रहा है।
46,000 किमी रेल लाइन पर इलेक्ट्रिक ट्रेन दौड़ेगी। पर्यटन वाले रूट्स पर नई ट्रेनें चलेंगी और नए कोच लगाए जाएंगे।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर 11,000 करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान।
प्राइवेट सेक्टर से 30,000 बसें लेकर चलाएगी सरकार।
बंगाल में नेशनल हाईवे पर 25,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
11,000 किलोमीटर के हाईवे का काम पूरा हुआ, मार्च 2022 तक 8500 किलोमीटर के हाईवे बनाए जाएंगे
देश में 7 टेक्स्टाइल पार्क बनाए जाएंगे, ताकि इस क्षेत्र में भारत एक्सपोर्ट करने वाला देश बने। ये पार्क तीन साल में तैयार किए जाएंगे।
वित्त मंत्री की ओर से डेवलेपमेंटघ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट बनाने का ऐलान किया गया, जिसमें तीन साल के भीतर 5 लाख करोड़ रुपये के उधारी प्रोजेक्ट हों।
बजट में ऐलान किया गया है कि रेलवे, NHAI, एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास अब कई प्रोजेक्ट को अपने लेवल पर पास करने की ताकत होगी।
वित्त मंत्री ने पूजीगंत व्यय के लिए 5 लाख कोरड़ से अधिक के बजट का ऐलान किया। यह पिछले बजट से 30 फीसदी अधिक है। इससे अतिरिक्त राज्य और स्वतंत्र बॉडी को दो लाख करोड़ रुपये भी दिए जाएंगे।
आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के तहत सरकार की ओर से 64180 करोड़ रुपये इसके लिए दिए गए हैं और स्वास्थ्य के बजट को बढ़ाया गया है।
सरकार की ओर से WHO के स्थानीय मिशन को भारत में लॉन्च किया जाएगा। देश की उन्नति के लिए ये सारी योजनाएं बहुत जरूरी है।
कुल मिलाकर नोर्मल बजट प्रस्तुत किया गया है जो देश की जनता को हलक के नीचे नहीं उतरेगा।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु