बताओ जरा,थोड़ा मुस्कुरा

कहां से आ रही हो
आज गजब ढा रही हो
बताओ जरा,थोडा मुस्करा
दिलरुबा,ऐ दिलरुबा
रूठ के ना तू जा,सुन तो जरा...

नजर नहीं आती दीखती हो कम
मिल तो नहीं गया
कोई नया सनम
ये मजाक या हकीकत है
फिर इससे
क्या तुझको दिक्कत है
सच में बता,ना दिखा नखरा
बता तो जरा,थोडा मुस्करा....

चिपकी है चेहरे पे कैसी मायुसी
कहां गई ताजगी,
वो पहले वाली खुशी
यौवन के भार अब
चढने लगी तुझ पर
पहले जैसी प्यार लुटाती नहीं
अब मुझ पर
लगता ख्वाबों में विचरने लगी हो
मुझे छोड किसी और पे
मरने लगी हो
तुम्हारी बातें कर रही
यही इशारा
बता तो जरा,थोडा मुस्करा....

कहां से आ रही हो
आज गजब ढा रही हो
बताओ जरा,थोडा मुस्करा
दिलरुबा,ऐ दिलरुबा
रूठ के ना तू जा,सुन तो जरा....
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राजेंद्र कुमार सिंह
rajendrakumarsingh4@gmail.com.
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