बेटी भी इस जहान की

बेटी भी इस  जहांन की,
उगता हुआ सूरज समान है,
जिसके आने से पूरा भूमंडल
हो जाता   प्रकाशमान है।
बेटी पूरे घर के सदस्यों की,
होंठों   की  मुस्कान   है,
जिसकी किलकारी से पूरा,
घर   खिलखिला उठता है।
बेटी अनेकों रूपों में ना जाने
जिम्मेदारियां सम्भालती हैं,
वो जहां भी जाती हर जगह,
एक रौनक सी बढ़ा देती है।
बेटी के बिना इस दुनियां की,
कल्पना करनाही असंभव है,
बेटी के इन सभी रुपों को
मेरा   शत् - शत् नमन है,
मेरा शत् - शत् नमन है।

चम्पा पांडे,वरिष्ठ गीतकार कवयित्री व
गजलगो,स्वतंत्र लेखिका व स्तम्भकार,
कालाढूंगी-नैनीताल,उत्तराखण्ड