बिचारा पत्रकार!

कौन सोचता है?
कलम का सिपाही ,
कलम के सहारे ,
जो अकड़ कर जमाने का ,
रुख मोड़ता है।
पत्रकारों के विषय में,
कौन सोचता है ?-----
शासन प्रशासन की ,
नजरों में गड़ कर,
सच्चाई को पर्दे पर,
लाता है लड़कर।
गलत धारणा को ,
जो कोसता है ।
पत्रकारों के विषय में,
कौन सोचता है ?----
मालिक भी जिसका ,
सुनता ‌न दुखड़ा।
  महज एक सम्मान का,
पाकर टुकड़ा।।
पत्रकारिता में जो जहर घोटता है।
पत्रकारों के विषय में ,
कौन सोचता है?---
बजट में भी जिसका,
नहीं जिक्र होता।
मान अपमान का न,
कोई फ़िक्र होता।
हाथों में जिसके ,
कलम की धार है।
वह कलम का सिपाही,
बिचारा पत्रकार हैं।
उसके गिरते आंसू कौन पोंछता है?
पत्रकारों के बिषय में,
कौन सोचता है?------
बनकर फकीरा और मस्तमौला।
लेकर सच्चाई निकलता है तनकर।
पत्रकारिता का चतुर बन चितेरा,
ख़बरें नित नया खोजता है।
पत्रकारों के विषय में कौन सोचता है?

-गौरीशंकर पांडेय'सरस।