देसी रोमांस बनाम वैलेंटाइन डे

पिछले पच्चीस सालों से पतिदेव की शर्ट की बटन टूटने से पहले ही हम टाँके मार उसे मजबूत कर डालते और कुशल ग्रहणी होने का परिचय दे रहे थे कि अचानक एक दिन एक नाटक में हीरोइन को अपने पति की शर्ट का बटन टांकते देखा वो भी पहने पहने ही.. बड़ा ही अद्भुत दृश्य था.. दोनो लगातार एक दूसरे की आंखो में झांक रहे थे, बैक ग्राउंड में संगीत बज रहा था और ये सब देख हमें भी कुछ कुछ हो रहा था वैसे भी वेलन्टाइन डे नजदीक था सो हर तरफ इश्क कि हवा बह रही थी ..हमें आज जाकर पता लगा था असली कि रोमांस कैसे करते हैं, फिर क्या था हमने तुरन्त एक शर्ट की बटन उखाड़ डाली और अगले दिन पतिदेव से जिद की कि वे वहीं शर्ट धारण करें और मुहब्बत में वृद्धि के लिए हम आंखो में आंखे डालकर बटन लगाएंगे ।

पतिदेव ने बहुत समझाया ऐसी हरकत के खतरे गिनाए पर हम पर तो रोमांस का भूत सवार था सो अड गए वैसे भी स्त्री हठ के सामने कौन जीत पाया है? सो अंत में जीत हमारी हुई अब शुरू हुआ बटन लगाने का काम ..पतिदेव काफी डरे हुए लग रहे थे आवाज में कम्पन के साथ बोले “डार्लिंग सम्भल कर सुई ना चुभ जाए “ पर उस वक्त तो हम पर आशिकी का भूत सवार था सो उनकी बात अनसुनी कर हमने मोबाइल में एक रोमेंटिक गाना लगाया गया ताकि माहौल बने और आंखो में आंखे डुबो हमने बटन लगानी शुरू की अभी एक ही टांका मारा था कि हमारी चीख निकली और आंखो से बरसात शुरू हो गई वो भी दर्द की ....
पूरी सुई बटन के बजाय उंगली में घुस चुकी थी खून बह रहा था , बैक ग्राउंड में पतिदेव का भाषण चल रहा था “ बच्चों जैसी जिद करती हो हर बात की ..इस बुढ़ापे में रोमांस सूझ रहा था ..नाटक देख के उलजलूल बातें सीखती हो ..अपनी उम्र का लिहाज नहीं है ..अब देखो कितना खून बह रहा है “ उनका भाषण उनकी चिंता सब जारी थे और हम रोमेंटिक हीरोइन बनने के बजाय ड्रेकुला बने खून चूस रहे थे वो भी अपना ।


देशी रोमांस ❤️❤️ अर्चना चतुर्वेदी लेखिका