राज्यसभा में अनुराग ठाकुर ने कृषि कानूनों को लेकर कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली : राज्यसभा में बजट पर चर्चा जारी है. वित्तराज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को कहा कि मैं कांग्रेस के नेताओं को खुली चुनौती देता हूं. कहां नए कानून में लिखा है कि मंडी खत्म होगा, एमएसपी बंद होगा. आप किसानों को भ्रमित मत कीजिए. हम किसानों की आय को बढ़ाने के लिए नए कानून लाए हैं. जो एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेट लगाया गया उसकी वजह से पेट्रोल डीजल के दाम नहीं बढ़े. उन्होंने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार ने पीएम किसान योजना के तहत किसानों को ₹14000 देने से मना कर दिया. ममता बनर्जी हठधर्मी हैं, जो आयुष्मान योजना का फायदा भी पश्चिम बंगाल के लोगों को नहीं मिल पाया है.
वहीं गुरुवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2021-22 के बजट पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि इस बजट में आशा की किरण दिखती है और इसमें देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही नए भारत के निर्माण पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह बजट ‘‘सशक्त भारत'' बनाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप है जिसकी सभी वर्गों ने सराहना की है.
निचले सदन में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की टिप्पणी का जिक्र करते हुए ठाकुर ने कहा कि वह बजट पर तैयारी करके नहीं आए.उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता सदन एवं देश में भी कम रहते हैं जिसका खामियाजा सामने आया है. उन्होंने कहा कि राहुल जी हम दो, हमारे दो की बात करते हैं, ऐसा कह कर वे दीदी, जीजाजी एवं बच्चों की बात करते हैं.
अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘‘मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि जिन दो उद्योग घरानों की बात करते हैं, उन्हें केरल में जब कांग्रेस की सरकार थी तब बंदरगाह क्यों दिया गया? ये आपके ही हैं, आपने ही पाले हैं.''उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ कहां यह लिखा है कि अमेठी से चुनाव लड़ने वाले राहुल गांधी चुनाव हारने के बाद वायनाड से चुनाव नहीं लड़ सकते। वह कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन अमेठी का किसान वायनाड में अपनी फसल को क्यों नहीं बेच सकता ? ''उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कुछ अन्य दलों के लोग झूठ बोलकर किसानों को गुमराह कर रहे हैं. गौरतलब है कि बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इन कानूनों के बाद देश का कृषि क्षेत्र दो-चार उद्योगपतियों के हाथ में चला जाएगा.