शामली में किसानों की महापंचायत को जिला प्रशासन ने मंजूरी देने से किया इनकार


शामली: उत्तर प्रदेश के शामली में किसानों की महापंचायत को जिला प्रशासन ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया. प्रशासन ने वहां पर 3 अप्रैल तक बड़े स्तर पर लोगों के इकट्ठा होने पर भी पाबंदी लगाई हुई है. महापंचायत के आयोजक किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन और राष्ट्रीय लोकदल का कहना है कि प्रशासन की मंजूरी नहीं मिलने के बाद भी विवादित तीनों कृषि कानून के खिलाफ बैठक की जाएगी. कृषि कानून का विरोध कर रहे राष्ट्रीय लोकदल की पूरे उत्तर प्रदेश में 5 फरवरी से 18 फरवरी तक कई पंचायतों का आयोजन कराने की योजना है. इसमें भारतीय किसान यूनियन भी उनके साथ है. ये पंचायतें दिल्ली सीमा के पास हो रहे किसान आंदोलन के समर्थन के लिए की जा रही हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सीमा पर हजारों की संख्या में किसान कृषि कानूनों के खिलाफ नवंबर महीने से धरने पर बैठे हैं.

बता दें, ये तीनों कानून सितंबर में संसद में पास किए गए थे. इन कानून का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में ना केवल भारत के बल्कि विदेशी सेलेब्रेटी भी सामने आ रहे हैं. इनमें सिंगर रिहाना, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेट थनबर्ग और यूएस-यूके के कई सांसद शामिल हैं, जिन्होंने भारत में किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया है. जिसका भारत सरकार ने कड़ा विरोध किया है. शामली में 4 फरवरी से लेकर 3 अप्रैल तक बड़े स्तर पर लोगों के इकट्ठा होने पर बैन लगाया हुआ है, जिला प्रशासन ने इसके लिए गुड फ्राइडे, महाशिवरात्री, होली का हवाला दिया है, जो इसी समयावधि में पड़ने वाले हैं. 
बता दें, पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के बागपत में हजारों की संख्या में लोग महापंचायत के लिए इकट्ठा हुए थे. इसके अलावा दूसरी बैठक भारतीय किसान यूनियन के नेता नरेश टिकैत ने यूपी के मुजफ्फरनगर में बुलाई थी, जो दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर से 150 किमोमीटर से भी कम दूरी पर है. गाजीपुर बॉर्डर किसान आंदोलन का केंद्र है. नरेश टिकैत के भाई राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. यूपी प्रशासन की ओर से गाजीपुर में प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने की कोशिश के बाद पैदा हुए तनाव के बाद यह पंचायत बुलाई गई थी.