डीएम ने आहार और बड़ागांव में गौशालाओं का किया निरीक्षण

बांदा। बबेरू क्षेत्र की ग्राम पंचायत आहार स्थित गौशाला का निरीक्षण बुधवार को जिलाधिकारी आनन्द कुमार सिंह ने किया निरीक्षण के समय ग्राम विकास अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में गौशाला में 202 गौवंश संरक्षित है। जिसमें लगभग 80 प्रतिशत गौवंशों की ईयर टैगिंग हो चुकी है तथा खाने के लिए भूसा, चारे एवं हरा चारा भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जिलाधिकारी ने उप मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 लाखन सिंह को निर्देश दिए कि अवशेष बचे गौवंशों की टैंगिंग का कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाये एवं समस-समय पर गौवशों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाये। उन्होंने खण्ड विकास अधिकारी बबेरू को निर्देशित किया कि गौवंशों के भरण-पोषण, साफ-सफाई आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। साथ ही कहा कि गोबर, गौमूत्र से वर्मीकम्पोस्ट, उपले आदि बनाये जाने की व्यवस्था की जाये। ताकि इससे होने वाली आय को उपयोग में लाया जा सके। इसके बाद जिलाधिकारी ने ग्राम बड़ागांव में गौवंश वन्य बिहार का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी एस के बघेल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 राजीव धीर, खण्ड विकास अधिकारी बबेरू डा0 प्रभात कुमार, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 लाखन सिंह, सहायक विकास अधिकारी आईएसबी, राजेश शुक्ला एनजीओ के प्रतिनिधि सहित सम्बन्धित सचिव उपस्थित रहें। निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि गौशाला का संचालन एनजीओ राज सोशल डेवलपमेन्ट सोसायटी के द्वारा किया जा रहा है। गौशाला की क्षमता लगभग 500 के सापेक्ष वर्तमान में 584 गौवंश संरक्षित है। निरीक्षण के समय ज्यादातर गौवंशों में ईयरटैगिंग नहीं पायी गयी। जिस पर जिलाधिकारी ने उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि अवशेष गौवंशों की टेगिंग तत्काल करायी जाये तथा गौवंशों का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाये। भूसा गोदाम के निरीक्षण में देखा गया कि पशु आहार की बोरियां रखी हुई तो थी लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पशु आहार गौवंशों को नहीं खिलाया जाता है, सिर्फ दिखाने के लिए रखा है। जिलाधिकारी ने एनजीओ संचालक के प्रतिनिधि को निर्देशित किया कि प्रतिदिन गौवंशों को पशु आहार खिलाया जाये। अन्यथा लापरवाही बरतने पर एनजीओ का अनुबन्ध निरस्त कर दिया जायेगा। निरीक्षण के दौरान गौशाला में लगे गौसेवक द्वारा बताया गया कि समय से उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है। जिलाधिकारी ने एनजीओ संचालक के प्रतिनिधि को निर्देशित किया कि 02 दिवस में उनका भुगतान कराया जाए और कृत कार्यवाही से अवगत कराया जाए।