अजिंक्य रहाणे : इस चीज की प्रैक्टिस से मिलती है मैदान पर हमेशा शांत रहने में मदद


ऑस्ट्रेलिया की सरजर्मी पर अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले अजिंक्य रहाणे ने मैदान पर अपने शांत रहने की वजह का खुलासा किया है। विराट कोहली की गैरमौजूदगी और खिलाड़ियों की चोटों से जूझने के बावजूद रहाणे की अगुवाई में टीम इंडिया ने कंगारू टीम को गाबा के मैदान पर पहली बार हराकर इतिहास रचा था। भारत ने लगातार दूसरी बार बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी को अपने नाम किया। 

अजिंक्य रहाणे ने बताया कि वह वेदांता फिलोसोफी की प्रैक्टिस करते हैं और इसकी मदद से ही वह मैदान पर इतने शांत नजर आते हैं। रहाणे ने कहा ने इंडियन एक्सप्रेस के साथ बात करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि यह मेरे अंदर अपने आप आया है। मैं वेदांता फिलोसोफी सीख रहा हूं और मैं इसकी प्रैक्टिस लॉकडाउन में भी कर रहा था। मैं फिलोसोफी को पिछले छह-सात साल से फॉलो कर रहा हूं। जिंदगी में सफलता और नाकामयाबी को लेकर मुझे इससे बहुत मदद मिलती है। इसकी मदद से मैं समझ पाता हूं कि जिंदगी में क्या महत्वपूर्ण हैं और कौन सी चीजें ज्यादा जरूरी हैं। यह मेरे लिए बेहद शानदार तरीके से काम कर रही है।'

अजिंक्य रहाणे ने अबतक 5 टेस्ट मैचों में कप्तानी की है, जिसमें से उनको चार में जीत मिली है, जबकि एक मुकाबला ड्रॉ रहा है। यानी रहाणे की कप्तानी में टीम इंडिया ने एक भी टेस्ट मैच में हार का सामना नहीं किया है। मेलबर्न टेस्ट मैच में रहाणे ने कप्तानी के साथ-साथ शानदार बल्लेबाजी करते हुए शतकीय पारी खेली थी। रहाणे ने अफगानिस्तान के खिलाफ सबसे पहले टेस्ट मैच में कप्तानी की थी और टीम को जीत दिलाई थी। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रहाणे की कप्तानी की तमाम क्रिकेट दिग्गजों ने जमकर तारीफ की थी।