बेसिक शिक्षा का स्तर को सुधारने के लिए अधिकारी निरंतर औचक निरीक्षण करें:मण्डलायुक्त


सहारनपुर। मण्डलायुक्त ए0वी0राजमौलि ने कहा कि मण्डल में बेसिक शिक्षा का स्तर को सुधारने के लिए अधिकारी निरंतर औचक निरीक्षण करें। उन्होंने शिक्षा में सुधार के लिए तीनों जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों से उनकी कार्ययोजना के बारे में भी जानकारी ली। उन्होने कहा 01 मार्च से विद्यालय खुल रहें है, ऐसे में कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए, विद्यालय को पूरी तरह से सैनेटाइज कराकर सभी सुरक्षात्मक उपाए करें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि विद्यालयों को सजाकर एक महोत्सव की तरह बच्चों का स्वागत किया जाए। उन्होने कहा विद्यालयों को समय से खोला जाए। उन्होने विद्यालयों और मौहल्ला कक्षाओं में न जाने वाले अध्यापकों को चिन्हित कर दण्ड़ित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ए.बी.एस.ए को सक्रिय कर शत-प्रतिशत विद्यालयों का निरीक्षण कराया जाए।

श्री ए0वी0राजमौलि आज यहां अपने कैम्प कार्यालय कक्ष से मिशन प्रेरणा के मण्डलीय कार्यों की वर्चुअल समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने मिशन प्रेरणा के तहत बच्चों को मौलिक शिक्षा उपलब्ध न कराये जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होने मिशन प्रेरणा के तहत सहारनपुर की प्रगति सबसे कम पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहारनपुर को कडे निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी शत-प्रतिशत बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न माध्यमों से आच्छादित करें। उन्होंने कहा कि उनके औचक निरीक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो सम्बधिंत के विरूद्ध कार्यवाही करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जायेंगा। उन्होने कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यवाही की रिपोर्ट उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होने कहा सिर्फ कागजी कार्यवाही न करें, कार्य धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
मण्डलायुक्त ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी अपनी कार्यशैली में बदलाव लाएं, वरना दण्ड़ के लिए तैयार रहें। उन्होने कहा अध्यापकों को सबसे ज्यादा ध्यान पढाई में कमजोर बच्चों पर देना है। उन्होने कहा यदि अध्यापक ही अनुशासन का पालन नही करेंगे तो बच्चों को अनुशासन कैसे सिखाएंगे। उन्होने कहा कि अपने दायित्वों का भली प्रकार से निर्वहन करने के लिए आपस में मधुर संबंध के स्थान पर विधिक संबंध होना जरूरी है। उन्होने कहा पढाई की औपचारिकता न करें, शिक्षण के परिणाम पर भी ध्यान दें। उन्होने कहा बच्चों को बेहतर सुविधा देने के साथ-साथ उनके शिक्षा स्तर को भी बढाना है।
श्री ए0वी0राजमौलि ने विद्यालयों में साफ-सफाई तथा बालक और बालिकाओं हेतु अलग-अलग और साफ-सुथरे शौचालयों की समुचित व्यवस्था हेतु कडे निर्देश दिए। उन्होने कहा कि हैण्डपम्पों के पानी की भी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में पढ़ाई के लिए शैक्षिणक योजना बनाई जाए जिससे विद्यालय में नामांकित सभी बच्चों को किसी न किसी साधन से पढ़ाई कराई जा सकें। उन्होने कहा कि बच्चों की क्षमता व उनकी रूची के अनुरूप उन्हे प्रोत्साहित कर उसी क्षेत्र में बढने में सहयोग किया जाए। उन्होने कहा बच्चों को जो पढाया जा रहा है उसका अर्थ भी समझाया जाए। उन्होने कहा लाइबे्ररी को व्यवस्थित तरीके से रखते हुए बच्चों को अच्छी-अच्छी किताबें मुहैया कराई जाएं। जिससे उनका बौद्धिक विकास हो सकें।
मण्डलायुक्त ने कहा कि हम साधन विहीन, गरीब बच्चों को शिक्षित करने का कार्य करते है। इसमें भी अगर लापरवाही होती है तो हम अपने दायित्वों के प्रति जागरूक नहीं है। उन्होने कहा कि यदि हम सब अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन नही करेंगे तो हम सरकार पर बोझ है। उन्होंने कहा कि मण्डल में निरीक्षण के दौरान यदि लापरवाही मिलती है तो सम्बंधित के साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के विरूद्ध भी कार्यवाही की जायेंगी।
इस अवसर पर संयुक्त विकास आयुक्त श्री सुनील कुमार श्रीवास्तव, सहायक निदेशक, बेसिक श्री योजराज सिंह, मण्डलीय समन्वयक श्री नीरज प्रताप सहित, उप निदेशक पंचायत, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहारनपुर श्री रामेन्द्र कुमार, मुजफ्फरनगर श्री मालाराम, शामली गीता वर्मा सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल मौजूद थे।