क्या वो फिर

वो खुश नुमा पल जिंदगी मे कब आऐंगे
फिर वो मेरे अपने,मेरे अपने हो जाऐंगे।।

सोचा ना था हम इस कदर जुदा होंगे कभी
क्या वो फिर आके मेरी गेसुओं को सुलझाऐंगे।।

सोचा ना था ये रात बिन उनके कटेगी नहीं
क्या वो फिर आके जिंदगी मे हमको सुलाऐंगे।।

मुस्कुरना जैसे अब तो हम सच भूले हैं
क्या वो फिर आके हसना हमको सिखाऐंगे।।

कभी उनकी पलकों मे सिर्फ़ हम समाते थे
क्या वो फिर अपनी पलकों मे हमको बसाऐंगे।।

खता यही की मोहब्बत मे रुह दिये बैठे थे
क्या वो फिर बिखरे हमारे जज़्बातों को सजाऐंगे।।

वीना आडवाणी
नागपुर, महाराष्ट्र