किसानों ,गरीबों, मजदूरों, बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों का बजट होने की उम्मीद है ।


कोविड़ 19 से उपजी वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने सरकार की ही नहीं, बल्कि आम आदमी की भी बैलेंस शीट बिगाड़ी दी है, जिसका अर्थव्यवस्था पर बहुत ही बुरा असर पड़ा है । ऐसे में सरकार और वित्त मंत्री से सभी की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, लिहाजा सरकार बजट में आयकर को लेकर कई प्रकार की घोषणाएं कर सकती है। सरकार अगर बजट में टैक्स में राहत देती है तो इससे न सिर्फ वेतनभोगी वर्ग को बचत होगी, बल्कि बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी । मेरे आत्मीय मित्र इसमें दो राय नहीं कि इस बार का बजट असाधारण परिस्थितियों में पेश किया जा रहा है ,यह बजट अर्थव्यवस्था के संकुचन वाले दौर से गुजरने के बीच पेश किया जाएगा। कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनियां में आर्थिक संकट है और भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने भी कई चुनौतियां हैं, देखे तो वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर माइनस 23.9 फीसद रही। उसके बाद यह माइनस साढ़े सात फीसद रही थी, जिसके चलते ही राजकोषीय घाटा बहुत ज्यादा है। वित्त मंत्री को यह भी ध्यान रखना होगा कि वह राजकोष के मोर्चे पर देश को मजबूत बनाने के कदम उठाएं, साथ ही वित्त मंत्री का ध्यान उन लोगों को राहत पहुंचाने की ओर भी होना चाहिए जो कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट के चलते अब तक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। हमने देखा कि गरीबों, मजदूरों, बेरोजगारों, किसानों और युवाओं को सबसे अधिक इस वैश्विक महामारी में संकटों का सामना करना पड़ा , इसलिए इन वर्गों को ध्यान में रखकर ही बजट लाना चाहिए ,आज हमारे अन्नदाता के दिन रात के मेहनत से ही इस वैश्विक महामरी में भी हमारी अर्थव्यवस्था संभली हुई है, बड़े-बड़े रिपोर्टों में भी खुलासा हो चुका है कि इस वैश्विक महामारी में भी भारत की अर्थव्यवस्था को केवल और केवल कृषि ही संभाली हुई है, फिर भी अन्नदाता का उपेक्षा क्यों? हमने देखा कि कोरोना महामारी के चलते लाखों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है, इसलिए सरकार को इन वर्गों को ध्यान में रखते हुए बजट बनाया जाना चाहिए ताकि लोगों को रोजगार मिले जिससे बाजार मे पैसे आ सके जिससे फिर तेजी से अर्थव्यवस्था पटरी पर दौड़ने लगे ,बेरोजगारी के कारण अर्थव्यवस्था में सुस्ती छाई हुई है, वहीं देखे तो लॉकडाउन में आर्थिक गतिविधियां महीनों तक बंद रहने के कारण सरकार की कमाई काफी घट गई है, ऐसे में खर्च करने के लिए उसके पास पर्याप्त फंड नहीं है, सरकारी खजाना भरने के लिए वह जनता पर टैक्स का बोझ भी नहीं बढ़ा सकती है, क्योंकि बेरोजगारी चरम पर है, उद्योग जगत को भी काफी नुकसान हुआ है. ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार के पास इस बजट में चुनौतियां कम नहीं होंगी, दरअसल बेरोजगारी के मोर्चे पर सरकार की पहले ही काफी किरकिरी हो चुकी है इसलिए सरकार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर फोकस करना चाह रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके। एक और महत्वपूर्ण बात इन दिनों किसानों का आंदोलन चल रहा है, इस पेशे को आकर्षक और टिकाऊ हम तभी बना सकते हैं जब समाधान किसानों के साथ-साथ उनके माहौल के भी काफी करीब होगा, किसानों की खस्ताहाल उनकी घटती आय के चलते है, आज के कृषि माहौल में किसी किसान को एक न्यूनतम वेतनभोगी जितनी आय कमाने में कम से कम 20 साल लग जाएंगे, ऐसे में जिस देश को कृषि प्रधान देश कहा जाता हो वहां के किसान आज चाहता है कि उसका बच्चा चपरासी बन जाए, लेकिन खेती ना करें l यहाँ आप समझ सकते ही है की देश के अन्नदाता का हालात क्या है? ऐसे में जब की हमने देखा कि इस वैश्विक महामारी में भी हमारे भारत के अर्थव्यवस्था को संभाली रखी तो वह केवल और केवल एक क्षेत्र था कृषि क्षेत्र फिर आखिर क्यों देश के अन्नदाता का हालत ऐसा है ? कहीं ना कहीं योजनाओं में ही चूक है , इस बार अन्नदाता के जीवन में बदलाव लाने वाली बजट आना चाहिए ना तो आप ही सोच कर देखो जब किसान अपने बच्चों को कृषि क्षेत्र में ना भेज कर चपरासी तक बनाने को तैयार हो तो फिर कैसे रोटी मिलेगी ,यह सच है कि कुछ किसान समृद्ध जरूर है जिनको अंगुलियों पर गिना जा सकता हैं, साथ ही रोजगार और रक्षा को लेकर भी बजट में विशेष हो यही उम्मीदें हैं।।

कवि विक्रम क्रांतिकारी ( विक्रम चौरसिया- चिंतक / पत्रकार/ आईएएस मेंटर/ दिल्ली विश्वविद्यालय 9069821319