जब सोचेगे तेरे कारण खेत बगीचा हार गया


राजा बड़ा हिरणकश्यप था पर जब हद से पार गया।
उसको सब कुछ देने वाला दाता ही संहार गया।

रहे पुत्र सौ लेकिन कोई महासमर में नहीं बचा,
एक भगीरथ अपने श्रम से पुरखों को भी तार गया।

यह नफरत और अहंकार भी
वैसे जग से जाएगा,
जैसे गया सिकन्दर जग से जैसे हिटलर जार गया।

और इधर देखों बापू के चरणों में वे सर भी हैं,
जिनके पुरखे जिनका पुरखा खुद बापू को मार गया।

ईस्ट इंडिया नव के मित्रों तुम भी तब पछताओगे,
जब सोचेगे तेरे कारण खेत बगीचा हार गया।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव