जानता हूं मैं

बाद मरने के मेरे,
आंसुओं का जो सैलाब आया
फर्जी है सब, जानता हूं मैं

आंखें बंद किए बैठे थे,
कण-कण मैं जब टूट रहा था
बहरे कान लिए बैठे थे,
पल-पल मैं जब सिसक रहा था

बाद मरने के मेरे,
हमदर्दी का जो ख्वाब आया
दिखावा है सब, जानता हूं मैं

मोहरा हूं मैं सिर्फ तुम्हारी,
चालाक हसरतों की शतरंज का
चेहरा हूं मैं सिर्फ तुम्हारी,
दिल में छुपी हुई नफरत का

बाद मरने के मेरे,
इंसाफ का जो इन्कलाब आया
खोखला है सब, जानता हूं मैं

जितेन्द्र ' कबीर '
संपर्क सूत्र - 7018558314