बसंत पर पतंगबाजी के लिए सज गए बाजार, लड़ेंगे पेंच

फर्रुखाबाद। बसंत पंचमी के लिए यानी कल आसमानी जश्न के लिए पतंगबाजी को लेकर तैयारी जोरों पर है। हर साल की भांति इस बार भी नगर के आसमान में पटी लाल-नीली, हरी-पीली पतंगें लहराएंगी। रंगी-बिरंगी पतंगों से सजा बाजार उन्हें आकर्षित कर रहा है। पतंगों व मांझे के स्टॉल से सज गये हैं। लोगों ने पर्व को लेकर खरीदारी शुरू कर दी है। नगर में बसंत पंचमी के दिन पतंगबाजी का बड़ा क्रेज है। शायद ही कोई बचता हो जो पतंगबाजी ना करता हो। सुबह तड़के से ही युवा घर की अटारियों पर चढ़कर ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाकर गाने बजाना शुरू कर देंते है। दिन भर पतंगबाजी चलती है। मौसम भी सुहाना होनें लगा है। जिसके चलते इस बार पतंगबाजी का इस बार और अधिक क्रेज रहेगा। पूर्व में तो मुलायम सिंह, अखिलेश यादव, राहुल गाँधी आदि सूबे के नेताओं के चित्र बनी पतंगे बाजार में उपलब्ध होतीं थी। लेकिन इस बार मोदी के विरोधियों के चित्र पतंगों से भी लगभग गायब है। नगर की कई दुकानों पर केबल मोदी के चित्र वाली पतंगे ही मिल रहीं है। बाजार में बच्चों को लुभाने के लिए मोटू-पतलू, बेन-10 और छोटा भीम जैसे कार्टून कैरेक्टर वाली पंतगें भी उपलब्ध हैं। अब कागज की पतंगों से ज्यादा प्लास्टिक की पन्नी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन्हें बच्चों द्वारा खूब पसंद भी किया जा रहा है। जिला प्रशासन की सख्त लहजे के बाद भी शहर में प्रतिबंधित मांझा खूब बिक्री हो रहा है। शहर की कई दुकानों पर इस मांझा दुकानदार ग्राहकों को दे रहें है। इस ओर अभी तक जिला प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। पेंच लड़ाने के दौरान अपनी पतंग न कटे, इसलिए बाजार में इसकी खपत ज्यादा है। जबकि यह डोर काफी हानिकारक है। इससे पशु-पक्षियों की जान को खतरा पैदा होता है। पतंगबाजी में शीशा युक्त मांझे का इस्तेमाल होने से पक्षी ही नहीं, मानव के लिए भी खतरा बना रहता है। दूसरों की पतंगों को काटने के लिए पतंगबाज तेज धार मांझा बनाने की कोशिश करते हैं। बाजार में पतंग दो रूपये से लेकर 20 रूपये, कच्चा धागा 2 रूपये से ढाई सौ रूपये, गिफ्ट पतंग 20 से 30 रूपये बिक्री हो रही है। बरेली में खलीफा की पतंग सबसे ज्यादा फर्रुखाबाद में बिक्री हो रहीं है। पतंग साज शिव कुमार नें बताया कि इस बार पतंग की बिक्री कम है।