॥ जीना सीखें ॥

गुलाब की तरह काँटो संग जीना सीखो
कमल की तरह पंक में भी खिलना सीखो
चींटी की तरह लगन से काम करना सीखो
मधुकर की तरह चमन में गुनगुनाना सीखो

हवा की तरह जग में बहना सीखो
खुशबू की तरह जग में महकना सीखो
नदी की प्रवाह जैसा मंजिल पे बढ़ना सीखो
फलयुक्त तरू की तरह झुक जाना सीखो

ऊँचे अट्टालिका जैसा ख्वाब रचना सीखो
सागर की तरह गंभीर बन जाना सीखो
हिमालय की तरह अटल हो जाना सीखो
दीपक की तरह जलकर जग को उजाला करना सीखो

सूरज की तरह दिन रात पथ पर चलना सीखो
चाँदनी की तरह कायनात में शीतलला उड़ेलना सीखो
शहद की तरह मीठी बोल बोलना सीखो
फूलों की तरह सदैव मुस्कुराना सीखो

तपस्वी की तरह कष्ट सह कर मानव सेवा सीखो
धरती की तरह जीवों को आँचल में बसाना सीखो
शबरी की तरह प्रभु से प्रेम करना सीखो
दानी की तरह क्षमा दान करना सीखो

बगुला की तरह ध्यान लगाना सीखो
ज्ञानी की तरह ज्ञान बाँटना सीखो
श्रवण की तरह जन्मदाता की सेवा करना सीखो
प्रभु राम की तरह आज्ञाकारी बनना सीखो

तारे की तरह नभ पे चमकना सीखो
समय की तरह निरंतर आगे बढ़ना सीखो
भगत सिंह की तरह देश पर कुरबान होना सीखो
झांसी रानी की तरह स्वाभिमानी बनना सीखो।

उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार
9546115088