परछाई का पीछा


परछाई का पीछा करना यह एहसास दिलाता है।
अभी हममें प्राण बाँकी है यह एहसास दिलाता है।।

अपनी करनी का एहसास लेकर चलता रहता परछाई का साथ।
अच्छे और बुरे कर्मों का परछाई बनकर चलता रहता है साथ ।।

अंधकार के उस तम का परछाई कराता रहता है एहसास ।
सामने कहीं प्रकाश किरण का आने का कराता रहता है एहसास।।

अंधकार के काले तम में परछाई का क्या मतलब।
प्रकाश बिना परछाई के अस्तित्व का क्या मतलब।।

परछाई का पीछा करना हमारा कभी लक्ष्य न हो।
परछाई बनकर पीछा करना केवल उसका लक्ष्य हो।।

साथ साथ चलकर भी परछाई हमसे कितना अलग।
रंग रूप से लेकर उसके चल चलन कितने अलग।।

पर श्याह रूप लेकर भी परछाई चलता साया बन।
अपनों से भी अपना बनकर परछाई रहता साया बन।।

अपने कर्मो का ज्ञान दिलाता परछाई का साया साथ।
अच्छे बुरे का ज्ञान दिलाता परछाई का साया साथ।।

हृदयवेध जब पीड़ा लगता केवल तब होता परछाई का साथ।
अपनों के दिये पीड़ा को परछाई मिलकर झेलता साथ।।

अंत ज्ञान की बातें बांधो उस परछाई के अस्तित्व से।
जब तक तन में सांस रहे अनुकरण करो परछाई के अस्तित्व से।।

श्री कमलेश झा
नगरपारा भागलपुर
बिहार 9990891378