---- तीखा तीर ----


नील   गगन  के  रंग  से 

धरती को रंग रही आज 

दर्द  गरीबी  का  समझ 

आ  गई  निर्धन समाज 

नई  सोच के साथ अब 

होंगे  सबके   ही  काज 

-------   वीरेन्द्र  तोमर