गुमराह


माँगे

फरियाद
आंदोलन
धरना
होता जब भी 
लेकर किसी न्यायिक जांच
या किसी नीति के विरुद्ध
क्यों चढ़ जाता उस पर
राजनीतिक कलेवर
और असली मुद्दा हो जाता गुमराह हमेशा दबकर
नेताओं, पार्टियों, अखबारों, मीडिया की सुर्खियां बनकर
होता कभी भी न्याय नहीं
मासूम लोग बस बन जाते बलि के बकरे
नाम पर आंदोलन के
फिर चाहे रहा हो युवा आंदोलन, किसी क्राइम के खिलाफ जन आंदोलन, आरक्षण के खिलाफ, नीतियों , बिल के खिलाफ
हो मसला कोई भी
हो मामला कोई भी
हो समस्या कोई भी
हो लड़ाई कोई भी
हो रोष कोई भी
असली मसला, असली मुद्दा
हो जाता हमेशा ही गुमराह
खोकर पार्टियों ,नेताओं बयानबाजी, अटकलें, टिप्पणियां
और कुछ शरारती तत्वों की मनमानियां
बस हर बार इसी तरह दब कर रह जाता है हो मसला कोई भी कभी भी
कैसी विडंबना है ये 
कैसी नियति है ये
इंसाफ के नाम पर बस 
हो जाता हल्ला, तमाशा बस हर बार ।।
.....मीनाक्षी सुकुमारन
      नोएडा