दो मुक्तक


बात वही,भाव वही पर अंदाज अलग है।

शब्द वही,अर्थ वही,पर आगाज अलग है।।
दबाने का सिलसिला चल निकला दोस्तों।
साथ वही,हाथ वही,पर अंजाम अलग है।।

मैं करूँ तो गलत है,तू करे तो ठीक है।
सच बोल,ये कैसी रिवायत है लीक है।।
पल भर में बदल जाती है भाव भंगिमा।
इस युग की यही सबसे बड़ी सीख है।।

कृष्ण कुमार निर्माण
करनाल,हरियाणा।