शक्ति मिशन और नारी एकता


रोहिणी एक सामान्य परिवार की बेटी थी ।
जब वह छोटी थी तभी उसके पिता की मृत्यु हो गई ।उसकी माता ने किसी भी तरह से संघर्ष करके उसे पढ़ाया लिखाया । ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान ही उसकी माता की भी मृत्यु हो गई। वह लगातार संघर्ष करती रही और वह शिक्षण कार्य करती थी । बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी । इस तरह वह अपनी पढ़ाई आगे भी करती रही ।उसे वहां संघर्ष करना मंजूर था लेकिन किसी भी व्यक्ति से मदद लेना पसंद नहीं था । मदद अगर किसी की हो भी तो इस तरह की हो कि जो भी वह कार्य कराना चाहती है वह कार्य उसका सही समय पर हो जाए । क्योंकि वह उसका अधिकार है ।देश में हर नागरिक का अधिकार है ।कुछ वर्ष बाद उसके पैर में फ्रैक्चर हो जाता है ।पैर की सर्जरी होती है । सर्जरी गलत हो जाती है लेकिन वह चिकित्सक को फिर कहीं और दिखाती है तो चिकित्सक कहते हैं," इसकी दोबारा से सर्जरी होगी और वह पूर्ण रूप से ठीक हो जाएगी। "
एक बार उसने फ्रैक्चर होने से पहले सोशल मीडिआ सम्बन्धी कोर्स करने का भी प्रयास किया। जब वह बात करने गई तो वहां पर प्रमाण पत्र देखकर कहा गया,"हाई स्कूल के प्रमाण पत्र में तथा बोर्ड के प्रमाण पत्र दोनों में दो वर्ष का जन्मतिथि में अंतर है। संशोधन करा कर लाओ। " वह विद्यालय में जाकर कई बार प्रयास करती रही कि वह उसमें संशोधन करा दे। लेकिन कोई भी इस बात को मानने को तैयार नहीं हुआ । यहाँ तक कि उच्च कार्यालय से मण्डल सचिव के कहने पर फॉर्म भी जमा किया ।
बल्कि एक सादा पर्ची पर लिखकर दे देते कि इनकी जन्मतिथि यह है ।बोर्ड में कोई भी ठीक नहीं कराना चाहता ।अब धीरे-धीरे वक्त गुजरता चला जाता है ।फिर उसी विद्यालय में शक्ति मिशन का कार्यक्रम कई महीने चलता है। एक दिन बाहर से अधिकारी गण आने वाले होते हैं । रोहिणी के पास खबर मिलती है कि वह उस विद्यालय में जाये और जाकर वह सब को यह बताए कि उसने किस प्रकार से संघर्ष किया है। और पैर में परेशानी होते हुए भी लगातार संघर्ष कर रही है ।वास्तव में वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके आज समाज में अच्छी तरह से जीवनयापन कर सकती है । लेकिन उसने जाने से इसलिए मना कर दिया क्योंकि वह जानती थी कि एक बार विद्यालय में सरकार द्वारा चलाई गई स्कीम के अनुसार जो वहां के बहुत पुराने विद्यार्थी थे उनको सम्मान पत्र मिले थे ।लेकिन उसके लिए कोई खबर भी नहीं की गई थी ।उसने कहा," शक्ति मिशन के साथ मेरा नाम एक दिन अखबार में छप जाएगा और उसके बाद में मदद करने के लिए कौन आयेगा ।कोई भी मदद करने नहीं आएगा । मैंने ऐसे कई उदाहरण देखे अख़बार और फेसबुक पर ।" उसका विचार था कि महिलाएं ही महिलाओं के साथ हों तो महिला शक्ति बढ़ सकती है ।पर जब किसी एक महिला को परेशानी आती है तो अधिकतर दूसरी महिलाएं उसके साथ खड़ी नहीं होती हैं। बस सबसे ज्यादा बड़ा कारण यही है ।शक्ति मिशन को पूर्ण रूप से सफल बनाना बहुत ही मुश्किल कार्य है ।जब तक नारी एकता मजबूत नहीं होती है ।तब तक शक्ति मिशन पूर्ण रूप से सफल न हो पायेगा । जबकि कभी किसी दूसरी महिला के साथ परेशानी होती है तो अक्सर कई महिलाएं ही यह कहती हैं । महिला मूर्ख है । उसे छुपाने की कोशिश करती हैं । उसे कमजोर बनाने की कोशिश करती हैं और यदि सभी महिलाएं एक हों तो वास्तव में महिला शक्ति स्वयं ही मजबूत हो जाएगी।

पूनम पाठक