साहित्यकारों के जज़्बातों को कोई ना रोक पाया

 

परचंम लहरा रहे भारतीय साहित्यकार

युगों युगों से भारतीय साहित्यिक जगत का परचंम लहराता आया है और आज भी लहरा रहा है।आज भी साहित्य से जुड़े लाखों दीवाने हैं जो आज भी कविताऐं,लेख,कहानीयां,लघुकथा या उपन्यासों के ज़रिये अपनी अटल छाप दिलों पे छोड़ रहें हैं।यदि आज हम अपने पुराणों को उठा के देखें तो युगों पूर्व भी महान साहित्यकार जन्में थे जिन्होंने बेहतरीन हमारे पूज्यनीय ग्रंथों को भी साहित्यिक रुप में लिखा।

तुलसीदास जी,कालीदास जी,सूरदास जी,रसखान जी,कबीर दास जी,रहीम जी  न जाने कितने अनगिनत महान लेखकों ने हमारी इस पवित्र भारत भूमि पर जन्म लिया जिनकी अटल छाप दिल के पटलों पर युगों युगांतर तक जिंदा रहेगी।

      साहित्य मे हमारी देव भाषा संस्कृत का भी लेख मिलता है।वहीं अगर ये कहा जाऐ कि हिन्दी भाषा लुप्त होती जा रही है तो ये कहना गलत होगा आज बहुत से साहित्यकार हिन्दी भाषा मे ही साहित्यिक रचना लिख रहें हैं ताकि हिन्दी भाषा को बढ़ावा मिले हम सारे साहित्यकार राष्ट्रीय भाषा को आगे बढ़ाने और सभी के दिलों मे हिन्दी भाषा के लिये सदैव सम्मान रहे इसके लिये बेहतरीन तरीके से सभी को जागरूक भी किया जा रहा है।

    आज कोरोना महामारी के चलते जहां एक दूसरे से मिल पाना साहित्यकार के लिये संभव नहीं हो पा रहा था उसी को ध्यान मे रख सभी की सुविधा को देखते हुए सोशल मिडिया की मदद ली गई ताकि हर कोई एक दूसरे से जुड़ा रहे और साहित्यकार की कल्पनाओं, जज़्बातों पे रोक ना लग सके।इस लिये बहुत सी साहित्यिक संस्थाओं ने मिल वाटसएप, फेसबुक आदि अपनी अपनी सुविधाओं को देखते हुए।साहित्यकारों के ग्रुप बना लिये जिसके चलते हमारे भारत देश के क्या,विदेशों के भी बहुत से साहित्यकार इन साहित्यिक ग्रुपों मे जुड़ सका और अपनी कलम संग कल्पनाओं की उड़ान भर जज़्बातों को निरंतर सजाऐ जा रहा है।जो साहित्यकार सिर्फ़ अपने भारत देश या अपने ही शहर की सीमाओं तक सिमित था वो आज कोरोनाकाल के चलते विदेशों मे भी असीम छाप छोड़ रहा है।साहित्यकार अपनी कलम पे रोक नहीं लगा सकते हैं चाहे जो पल हो जब मन मे जज़्बात समाते उकेर देते कागज़ों के पटल पे अपने दिल की बात।आज अगर साहित्यकारों मे खास करके परिचर्चा करके औरतों से पूछा गया कि आपका या कोरोना काल का अनुभव कैसा रहा,बहुतों से मैंने खुद भी पूछा अस्सी फिसदी साहित्यकार औरतों ने मुस्कुराहट बिखरते हुए यही उत्तर दिया की बेहतरीन जिंदगी का तोहफ़ा,हमारी पहचान हमें साहित्यिक जगत मे घर बैठे ही मिली जो समाज हमसे या हमारी कलम से परिचित नहीं था वो भी अब हमें जानने लगा है।जितना प्रसन्नता आज भारतीय महिला साहित्यकार को है ठीक उतनी हीं कवियों को भी उन्हें घर बैठे ही मंच मिलते रहे जिसपे वो अपने जज़्बातों को मोतियों सा पिरो शब्दों मे सभी के साथ साझा करते रहे।साथ ही एक दूसरे के कोरोना काल के अनुभव भी साझा कर सभी एक दूसरे की सलामति की दुआ शब्दों के माध्यम से करते रहे।बहुत से साहित्यकार ऐसे हैं वो इस महामारी से पूर्व ही घनिष्ट मित्र थे वो एकदूसरे संग ग्रुप के माध्यम से जुड़े रहे।बहुत से अनज़ान लोग एक दूसरे से साहित्यिक जगत मे इस कदर घुल मिल गये हैं कि जैसे बरसों से एकदूसरे को जानते हों।आज भारत के साहित्यकारों के साथ-साथ विदेशों के भी साहित्यिक दुनिया के दीवाने लोग जुड़े जा रहे हैं और अपनी रचनाओं से मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।कई वरिष्ठ साहित्यकार इतने उदार दिल के हैं कि वो अपनी विद्या को सिर्फ़ खुद तक सिमित न रख सभी को एक शिक्षक/शिक्षिका की तरह सिखा भी  रहे हैं।आज हर कोई साहित्यकार दिल लगा कर उन विद्या को सिख रहा है जो अभी तक सुनी भी न थी कि काव्य को इस रुप मे भी लिखा जा सकता है।गीत,गज़ल,दोहे,तुकबंदी, हाईकु,सिंहनाद, साईली छंथ,घनाक्षरी छंद इत्यादि।कितनी शैलियां हैं जिन्हें हर कोई सिखने को आतुर है।इन ग्रुपों मे हर सप्ताह कभी काव्य गोष्ठी, कभी गीत प्रतियोगिता, कभी लेख प्रतियोगिता, कहानी,गज़ल आदि बहुत सी प्रतियोगिताओं का आयोज़न कर ई-सम्मान पत्र देके सम्मानित कर सभी के दिल मे उत्साह को बनाऐ रखा गया ताकि हर साहित्यकार और बेहतर लिख अपनी योग्यता को ओर भी प्रखरवता प्रदान कर सके।सच साहित्यकार के जज़्बातों,कलम को कोई रोक न पाया था और ना रोक पाऐगा।साहित्यिक जगत आज देश मे ही नहीं विदेशियों को भी आकर्षित कर रहा है।साथ ही हिन्दी भाषा को जिंदा रख साहित्यकार अपनी पहचान बना परचंम लहरा रहे हैं।

काव्य जगत की दुनिया में अभी हमने कदम बढ़ाया।।

वाद-विवाद पेचिदा किस्सों से ये जगत समाया।।

कभी लगे ये काव्य गोष्ठी पाषाण युग की सैर कराया।।

तो कभी भविष्य के उच्चोतर हसीन स्वपन भी दिखलाया।।

महान साहित्यकार,,कवियों संग भेंट कर दिल गदगद मुस्कुराया।।

सूक्ष्म रूप से हर बारिक पटल सीख हमनें कवियों से ज्ञान भी पाया।।।

महान नहीं पर छोटे प्यादे बन अपना वर्चस्व कवि क्षेत्र में लहराया।।।

पा लेंगे वो औहदा एक दिन जो ख्वाब हमनें जो दिल में सजाया।

कभी तीखे कटाक्ष बाणों संग रूह पे प्रहार कराया।।

तो कभी हस्या कवि बन सबको हसाया।।

वसुन्धरा से सबको अवगत करा रोम-रोम महकाया।।

गंतव्य पे बैठे-बैठे ही ब्रम्हांड का विचरण करता कल्पनाओं संग दिमाग दौड़ाया।।

उठाई जो फिर कलम हाथ में मां सरस्वती का आशिक्ष संग था पाया।।

काव्य जगत की दुनिया में अभी हमने कदम बढ़ाया।।

काव्य जगत की दुनिया में अभी हमने कदम बढ़ाया।।


वीना आडवानी

नागपुर, महाराष्ट्र