प्रज्ञा

प्रज्ञा बुद्धि है

विचार शीलता हैं
चित्त का प्रकाश हैं
अंतर्मन में
अंतगर्भ में
अंत व्यक्तित्व में छिपी
कल्पना,विचार
विवेक बुद्धि
है प्रज्ञा।
प्रज्ञा विश्लेषण हैं
निर्णय हैं
बुद्धि का पर्याय नहीं
बुद्धि का प्रकाश,
मन की अनुभूति,
प्रकाश से परिपूर्ण
ऋतंभरा
है प्रज्ञा।

गरिमा राकेश गौतम
कोटा राजस्थान