एसिड अटैक


तु उदास क्यों पड़ी है।

मायूस क्यों हो गयी है।
तेजाब ने तेरे शरीर को झुलसा दिया।
बदन को कुरूप बना दिया।
तो क्या हुआ ? मन तो तेरा सुंदर है।
शरीर की सुन्दरता को कोई याद नही रखता।
मन की सुन्दरता ही याद रहती है।
शरीर को एक दिन जल जाना ही है,
फिर आज ही सही।
झुलसे हुए तन मे अभी तेरा मन,
तेरी आत्मा तेरे पास है।
इरादों को फौलाद बना।
हौसलों को बुलन्द कर।
तू आगे बढ़! आगे बढ़!
जग मे तुझे अभी बहुत से काम है करने।
बक्त हाथ फैलाए खड़ा है!तेरे वजूद को तराशने।
तु सब के लिए एक मिशाल बन! मिशाल बन!

प्रियंका पांडेय त्रिपाठी
प्रयागराज उत्तर प्रदेश
स्वरचित एवं मौलिक