प्लास्टिक थैलियों पर रोक लगाई जाए


सीतापुर। मानव जीवन शैली में पॉलिथीन व प्लास्टिक का प्रयोग मनुष्य के जीवन में एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। वहीं दूसरी ओर पर्यावरण को भी अधिक प्रभावित कर रहा है। इसको बन्द कराने के लिए समय समय पर सरकारों ने काफी प्रयास करें। कठोर कानून बनाये लेकिन मानव जीवन में इसका प्रयोग बंद नहीं हो सका। जब शासन ने सख्ती की तो प्रशासन भी हरकत में आ जाता है लेकिन आज तक बंद नहीं कराया जा सका। प्रधानमंत्री मोदी ने भी मन की बात कार्यक्रम में प्लास्टिक कचरे से मुक्ति का अभियान छेडने का शंखनाद किया था और 2 अक्टूबर 2019 से एक बार उपयोग में आने वाली प्लास्टिक की वस्तुओं को त्यागने व पॉलिथीन मुक्त की शुरुआत हुई लेकिन अब शासन व प्रशासन सभी इस बार आंख बंद किये हुए है। यही कारण है कि आज पर्यावरण ही नहीं मनुष्य और पशुधन के जीवन के लिए भी यह बड़ा संकट बनकर उभरा है क्योंकि येनकेन प्रकारेण प्लास्टिक खानपान की चीजों के साथ पेट में पहुंच रही है। इससे मनुष्य विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहा है। साथ ही मवेशी भी बड़ी संख्या में पॉलिथीन खाकर अपनी जान गवां रहे हैं। शासन व प्रशासन की उदासीनता के कारण ही आज दुकानों, ठेलों, सब्जियों की दुकानों पर हर जगह खुलेआम पॉलिथीन की थैली प्रयोग में लाई जा रही है कोई भी इस पर प्रशासन का अंकुश नहीं है। शासन ने जब इसके प्रयोग के खिलाफ  कठोर कानून बनाये थे दंड की व्यवस्था व जुर्माना की भी जगह जगह छापा मारते थे। जिसके चलते बाजारों से पॉलिथीन व मानक के विपरीत प्लास्टिक का सामान बाजारों से गायब हो गया था लेकिन धीरे धीरे प्रशासन भी चुप हो गया और आज खुलेआम प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग चल रहा है। कोई भी इसको बन्द कराने की आवाज भी नहीं उठा रहा है। वरिष्ठ व्यापारी नेता रमेशचंद्र गौड़, हरनाम सेठ, विकास अग्रवाल, दिलीप स्याल, अनिल रस्तोगी ने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की है। देश के राज्यों में प्लास्टिक की थैलियां व प्लास्टिक का सामान जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उक्त फैक्ट्रियों को तत्काल देश से बंद करा देने का कानून बनाना चाहिए जिससे उक्त समस्या का निराकरण हो जाये। उक्त व्यापारियों ने कहा है कि फैक्ट्रियां बन्द होने से मानव जीवन का स्वास्थ्य भी अच्छा होगा और छोटे छोटे व्यापारी भी शोषण से मुक्त होंगे। जो थैलियों की जांच से परेशान किये जाते हैं।