आशा की किरण


चुप शांत रहो हे भारतवासी भारत माता को करने दो आराम

चीर प्रतीक्षा कर भारत माता ले रही दो सुकून के सांस ll

बड़े बड़े योद्धा को भी धराशाई कर दिया सकून
जब धर्म विजय कर पांडू पुत्र ने दे दिया है उनको सुकून ll

उस दौर में कई लोग थे जिसने उठाया था प्रश्न
काल और परिस्थिति ने ठंडा कर दिया उनका प्रश्न ll

प्रश्न उठा कर वाह-वाही बटोरना क्या यह मानवता सिखाता है
दम लगा कर सही दिशा में चलना यही तो धर्म सिखाता है ll

छल प्रपंच और अंदर से घात शकुनी जैसों का काम है
बाहुबल का प्रयोग कर लड़ना वीर योद्धा का काम है ।।

पथ से भटके राही भी अपने को समझते महान
ताक झांक कर ढूंढ रहे हैं अपने बचने का इंतजाम ।।

दौर खत्म हुआ राजतंत्र का अब ना बनेगा कोई राजपूत्र प्रजातांत्रिक व्यवस्था में अब सामान्य जन ही भागेगा राज सुखll

अपने में दम-खम लाकर ही अदना भी बन सकता खास
एक साधारण कार्यकर्ता भी पहन सकता है सत्ता का ताज ll

अब तो लगता है जैसे आने वाला समय भारत के लिए है बेहद खास
इसीलिए तो भारत माता ले रही है दो चैन के सांस ll

अब ऐसा अनुमान करें हम दुश्मन की होगी बोलती बंद
घर के अंदर बैठे भेदी का भी हो जाएगा बोलती बंद।।

घर और समाज भी अब धीरे-धीरे होगा खुशहाल
विश्व पटल पर नाम हमारा करेगा यह नया समाज ll

आशा की किरणें बंधी है 130 करोड़ और भारत माता का आज
इस आशा को जिंदा रखना पहनकर तुम सत्ता का ताज ll

नहीं तो यह प्रजातंत्र है फिर आगे का कर लो ख्याल
पुनः किसी चंद्रगुप्त को ढूंढ लेगा यह सकल समाज ।।।3

कवि कमलेश झा
9990891378