तेरा प्यार मेरा इज़हार


कर ना सके जहां तुमने बोलो कैसे कर डाला,

प्यार की कश्ती में मुझको बोलो कैसे भर डाला ।
कभी किसी की चाह न थी,
उम्मीद चाह की भी न थी ।
तुमने वह कर डाला जो
हिम्मत किसी ने की न थी ।
धोखा मिलने पर मैंने, कसम वहीं खुद खाया था
कभी किसी को चाहो मत बस दिल ने मुझे बताया था ।
बिखरे-बिखरे सपनों को मैं,
फिर से सजग सजाया था ।
मन मंदिर में एक बार अरु
पुष्पित पुष्प चढ़ाया था ।
जन्म जन्म का साथ निभाना कैसे भला निभाओगे ,
टूटा बिखरा दिल है इसको कैसे तुम समझाओगे ।
पास था मैं जब दूर हो गई दिल को कहाँ भुलाऊँगा,
अनजान फरिश्ता बन के आया कद्र कहाँ कर पाओगे।।
रोक न अब पाओगे मुझको
बोलो क्या फरमाओगे ।
मुझ पंछी की पंख कटी है,
सुख में क्या रह पाओगे?
पल-पल मुझे सताती हो तुम पल-पल मुझे रुलाती हो,
सूखे लकड़ी के जैसे तुम ख्वाहिश सदा जलाती हो ।
जब संकट में मैं रहता हूं तब खुशियां बहुत मनाती थी,
अब तेरी बारी है देखें कैसे फ़र्ज निभाती हो ।
टूटे हुए से पत्थर को भी लोग जोड़ना लेते हैं अक्सर,
टूटे हुए से दिल को देखें कैसे प्रिया सटाती हो।

अनुप शर्मा
मोनाबारी गाउँ
विश्वनाथ,असम