आँखों को क्या हुआ,.


खंडहर भी बोलते हैं ,

पूछो अगर मुहब्बत से ,
वीरान सी बस्ती है ,दिल,
मेरा ,यारों  तो क्या हुआ ,
हाल अपना लिख दूं कि,
उनकी कहानी लिख दूँ ,
बेवफा तो थे नहीं मगर ,
किस्मत को क्या हुआ ,
न कोई वास्ता तेरा न ,
रिश्ता भी उनसे  कोई,
दास्तान पर उसकी तेरी,
आँखों को क्या हुआ ,
तूफान - इश्क दिल में,
उठते हैं कहाँ.हैं अब,
रब जाने प्यार की उन,
हंसीं मौजों को क्या हुआ ,
एतबार  इंतेज़ार और,
इंतेखाब मेरा ' मुश्ताक ' ,
बता - बता वफा - शुआर,
तेरी बेकरारी को क्या हुआ ,

डॉ . मुश्ताक़ अहमद
शाह" सहज़"  हरदा 
मध्यप्रदेश