बचपन का इश्क़


बचपन का इश्क कितना पावन होता है

निश्चल, निर्मल बड़ा हीं मनभावन होता है
होता है अलग कशिश अलग नशा इस इश्क में
किसी के मुस्कराहट पर दिल दिवाना होता है |

बचपन का वो प्यार , और उसके नखरे हजार
कैसे भूला जा सकता है वो पहला पहला प्यार
पहली बार जब उनसे निगाहें चार होती है
आँखों हीं आँखों में फिर उनसे बात होती है |

उससे बात करने को दिल मचला करता है
देखकर उसको दिल को शुकून बहुत आता है
जब वह चेहरा नजरों के सामने आ जाती है
उस मासूम से दिल को करार आ जाता है |

हाथ मिलाकर जब वो चुपके से दबा देता है
आँखों हीं आँखों में जब हौले से मुस्करा देता है
उसका चेहरा दिल में बिजली सी चमक जाती है
मासूम सी मुस्कान दिल को बहुत सताती है |

उसे देखने के लिये हम राह निहारा करते हैं
इंतजार में उसके पलके बिछाया करतें हैं
उसके आने से निर्निमेष निगाहें चमक उठती है
बंजर पड़ी दिल की जमीं की प्यास बुझ जाती है |

होता है बड़ा मासूम बचपन का ये इश्क
थोड़ा नादान, हर गम से अंजान होता है ये इश्क
पानी के बुलबुले सा होता है बचपन का इश्क
पर जो भी हो सफर सुहाना होता है बचपन का इश्क |

कमला सिंह ' महिमा '
खोरीबाड़ी, पश्चिम-बंगाल |