नगर निगम में भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मनमानी व तानाशाही


लखनऊ। राष्ट्रीय सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मोहम्मद आफ़ाक ने जारी अपने बयान में कहा कि बहुत जल्द लखनऊ नगर निगमों में हो रहे भ्रष्टाचार वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 15 से 20 साल से एक ही जगह पर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी जमे हुए हैं, जिनका कभी ट्रांसफर नहीं हुआ, जबकि पूर्व नगर आयुक्त ने आदेश भी किये थे मगर ट्रांसफर अभी तक नहीं हुए, जबकि नियमानुसार 5(पाँच) वर्ष के भीतर ट्रांसफर अनिवार्य है।  कुछ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 8वाँ पास हैं, उनसे लिपिक (क्लर्क) का काम कराया जा रहा है। यह अधिकारियों की मनमानी और तानाशाही का नतीजा है, जबकि शासन के आदेशानुसार चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी मृतक की मृत्यू के उपरान्त सन् 1974 के आदेशानुसार हाईस्कूल पास लिपिक की नियुक्ति 1974 के आदेशानुसार जिसका नियम पाँच साल का अनुभव और साक्षात्कार है। जबकि नगर निगम फर्जी तरीके से शासन आदेश को बदलकर टाइपिस्ट की परीक्षा देना अनिवार्य किया है, जबकि ये नियमानुसार उचित नहीं है।