अब सबको मुस्काने दो


नये वर्ष के नवजीवन में

नई उमंगें आने दो ,
इंसानों की दुनिया में तुम
अब सबको मुस्काने दो।
सत्य प्रेम की बातों से तुम
जग को भी तर जाने दो,
आशाओं और उम्मीदों को
नये ख्वाब सजाने दो।
तम की काली रातों में अब
पूर्णिमा घुल जाने दो ,
जीवन की हर एक मुश्किल में
नई राह खुल जाने दो ।
आपस की कटुता को तुम भी
मिट्टी में मिल जाने दो ,
अपने सारे अहम भाव को
चूर-चूर हो जाने दो ।
झूठ अगर बढ़ता है आगे
उसको शूल चुभोने दो,
अपनी इच्छा शक्ति से
जीवन को महकाने दो।
धरा और अंबर के मन में
एक नया राग छिड़ जाने दो,
बादल के हर एक टुकडें को
नीलगगन में गाने दो।
सूरज की लालिमा में तुम
नये रंग मिल जाने दो,
चंदा की नगरी में तुम भी
इकतारा बन जाने दो।
गंगा की लहरों में तुम भी
प्रेम सुधा बह जाने दो,
इस धरती के एक-एक जन को
प्रेम का सूप पिलाने दो।
इस मिट्टी के एक-एक कण में
नये बीज बिखराने दो,
आशाओं की फुलवारी में
नये फूल खिल जाने दो।
इन्द्रधनुष की छटा मनोहर
जीवन में बस जाने दो,
पानी की लहरों -सा जीवन
डूबने-उतराने दो ।
भारत मां के ख्वाबों को भी
अब पूरा हो जाने दो,
लहर-लहर लहराए तिरंगा
उसको भी मुस्काने दो।
नये वर्ष के नवजीवन में..
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कार्तिकेय त्रिपाठी राम
गांधीनगर इन्दौर
संपर्क-7869799232