"यूँ ही चला चल राही"


ज़िंदगी के सफर में,

खुद के हमसफर बनो,
तलाश न करो किसी की,
बस खुद पर विश्वास रखो।

हार मिले तो सबक लो,
गलतियों की पहचान करो,
नूतन अभिलाषा का संचार करो,
कर्मपथ पर खुद को अग्रसर करो।

कर्मशील बनो,खुद को पहचानो,
साबित कर दो खुद को,
अब मत सहो अन्याय को,
बना लो हौंसला ऊँची उड़ान का।

मेहनत के पंखों को खोलो,
छू लो उस नील गगन को,
कर लो पूरे स्वप्न जो हैं अधूरे,
अपनी शक्ति को पहचानो।

अपने लक्ष्य को पहचानो,
अपनी जिज्ञासा को जानो,
जीवन सफल बना लो यारों,
जी लो इस पल को यारों।

न जाने आने वाला पल,
क्या पैगाम लेकर आए?
इसीलिए,
हँस कर जी लो ज़िंदगी को यारों,
क्योंकि,
कोई न रोक पाया है,
कोई न रोक पाएगा,
समय की बहती धारा को।

अभिव्यक्ति- ज्योति रानी
प्रशिक्षित स्नातक शिक्षिका
केन्द्रीय विद्यालय