बीत रहा साल है


अपने मन में बुरा ख्याल न रखे कोई

बीत रहा साल है मलाल न रखे कोई

तन्हाईयों में डूबे दिन गम की काली रातें सब
नया साल आ रहा है भूल जाएं बातें सब
दुर्भावनाएं मन में जो है,आओ सब निकाल दें
प्यार से एक दूजे की बांहों में बाहें डाल दें
मिल जाएंगे जवाब भी,सवाल न रखे कोई
बीत रहा साल है मलाल न रखे कोई

रखेंगे नफरत का भाव हम दिल में नहीं
होगा कोई स्वार्थ का प्रभाव अब दिल में नहीं
खुद के लिए बहुत जिया जिएंगे औरों के लिए
सबको गले लगाएंगे मुस्कान होठों पर लिए
नरम रहें सब खून में उबाल न रखे कोई
बीत रहा साल है मलाल न रखे कोई

उत्साह से अपने अब चमन बहार तोल दें
बांध करके न रखें अब मन के द्वार खोल दें
मन से किसी के भी मन में न कोई दूरी हो
मन की जो बातें सभी हैं मन ही मन में पूरी हो
वेदना से मन को अब बेहाल न रखे कोई
बीत रहा साल है मलाल न रखे कोई
बीत रहा साल है मलाल न रखे कोई

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली