सीवर लाइन कनेक्शन का शुल्क नगर निगम की तर्ज पर तय करने को छावनी परिषद बोर्ड बैठक में हंगामा

                                          
लखनऊ। छावनी में बिछ रही सीवर लाइन के कनेक्शन के शुल्क को लेकर बुधवार को बोर्ड बैठक में हंगामा हो गया। सदन के सभी सदस्यों ने सीवर लाइन कनेक्शन का शुल्क नगर निगम की तर्ज पर तय करने की मांग की। जबकि बोर्ड में सीवर कनेक्शन के दौरान सड़क को होने वाले नुकसान को भी शुल्क में जोड़ा गया था। जीओसी मेजर जनरल राजीव शर्मा ने जब पूछा कि क्या शुल्क के लिए कोई सर्वे हुआ है, तो बताया गया कि अब तक नहीं किया गया। ऐसे में जीओसी ने नाराजगी जताते हुए 17 जनवरी तक छावनी के सभी 5500 घरों का सर्वे कराने का आदेश दिया। सर्वे रिपोर्ट के बाद कनेक्शन शुल्क तय किया जाएगा। छावनी परिषद ने शून्य से 15 मीटर की दूरी तक खड़ंजा से सीवर लाइन की पाइप डालने पर प्रति घर 14740 रुपये, इंटरलाकिंग वाली सड़क से कनेक्शन चार्ज 17036 रुपये, डामरयुक्त सड़क में से पाइप लाइन डालने पर 22746 रुपये और आरसीसी रोड से सीवर लाइन कनेक्शन देने का शुल्क 24939 रुपये रखा गया था। परिषद सदस्य जगदीश प्रसाद, स्वाति यादव, अमित शुक्ल, रीना सिंघानियां, संजय वैश्य, पूर्व उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा और उपाध्यक्ष रूपा देवी ने भी शुल्क की दर को पचास फीसद कम करने की मांग की। बोर्ड बैठक में शाम की ओपीडी शुरू करने पर निर्णय हो गया। शाम को स्पेशलिस्ट डॉक्टर बैठेंगे। तीन डॉक्टरों की तैनाती पर सहमति बन गयी। रोगियों को दिखाने के लिए फीस 100 रुपये हो सकती है। वहीं बंगला नंबर 226 महात्मा गांधी मार्ग को बना रहे स्वामी ने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए अब एक साल की अतिरिक्त मियाद मांगी है। हालांकि सीईओ अमित कुमार मिश्र, डीईओ विकास कुमार के साथ स्टेशन हेडक्वार्टर के एक सैन्य अफसर की टीम मौके का निरीक्षण करेगी। पूर्व उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा ने कहा कि वर्तमान सदन का कार्यकाल 10 फरवरी 2021 को पूरा हो रहा है। चुनाव न होकर वैरी बोर्ड के आसार हैं। इसलिए लंबित प्रोजेक्टों को बजट देकर काम शुरू करवाया जाए। जीओसी ने लंबित प्रोजेक्टों की लिस्ट बनाने के आदेश दिए।